1)- सैय्यदउल मुरसलीन कासिम ए रिज्कअल्लाह आकाओं मौला हुज़ूर रसूलअल्लाह सल्लल्लाहो ताआला अलैहि वसल्लमﷺ ईरशाद ए हक्कों नूर फरमाते हैं बंदे के कुफ्र और ईमान में फर्क ही नमाज़ हैं जो नमाज़ अदा करता हैं वो मुसलमान हैं और जो नमाज़ अदा नहीं करता वो अमलन काफिर हैं।
{हवाला:सहिह मुस्लिम शरीफ़ आहादीस:246 सहिह सनद}
{हवाला:अल तहकीक ए ग़ज़ाली मुस्ताफाई}
2)- सैय्यदउल मुरसलीन कासिम ए रिज्कअल्लाह आकाओं मौला हुज़ूर रसूलअल्लाह सल्लल्लाहो ताआला अलैहि वसल्लमﷺ ईरशाद ए हक्कों नूर फरमाते हैं जिसने नमाज़ छोड़ दी उसने कुफ्र कर दिया।
{हवाला:आहादीस जामे तिरमिज़ी शरीफ़ सहिह सनद}
{हवाला:आहादीस सुन्ना अन निसाई शरीफ़ सहिह सनद}
{हवाला:आहादीस सुन्ना अबी माज़ा शरीफ़ जिल्द:01 सफाह:81 सहिह सनद}
{हवाला:अल तहकीक ए ग़ज़ाली मुस्ताफाई}
3)- हज़रतें अब्दुल्लाह बिन शफीक़ रज़िअल्लाहु ताआला अन्हुमा इर्शाद फरमाते हैं कि हज़रतें सहाबा ए इकराम रज़िअल्लाहु ताआला अन्हुमा आमाल में से सिर्फ नमाज़ छोड़ने को ही कुफ्र जानते थें यानी किसी को नमाज़ पड़ते हुए देखते थें तो कहते थें ये मुसलमान हैं और जिसे नमाज़ छोड़ते हुए देखते थे तो कहते थें ये काफ़िर हैं।
{हवाला:आहादीस जामे तिरमिज़ी शरीफ़ सहिह सनद}
{हवाला:अल तहकीक ए ग़ज़ाली मुस्ताफाई}
4)- सैय्यदउल मुरसलीन कासिम ए रिज्कअल्लाह आकाओं मौला हुज़ूर रसूलअल्लाह सल्लल्लाहो ताआला अलैहि वसल्लमﷺ ईरशाद ए हक्कों नूर फरमाते हैं जो शख़्स जानबूझकर एक वक़्त की नमाज़ छोड़ दे तो उस पर से अल्लाह रब्बुलइज़्ज़त का ज़िम्मा उठ गया।
{हवाला:अलइतहाफ जिल्द:06 सफाह:392}
{हवाला:अल तहकीक ए ग़ज़ाली मुस्ताफाई}
5)- हज़रतें अब्दुल्लाह बिन बुरैदा रज़िअल्लाहु ताआला
अन्हुमा से रिवायत हैं सैय्यदउल मुरसलीन कासिम ए रिज्कअल्लाह आकाओं मौला हुज़ूर रसूलअल्लाह सल्लल्लाहो ताआला अलैहि वसल्लमﷺ ईरशाद ए हक्कों नूर फरमाते हैं मौमिन और मुनाफिक के दरमियान अहद नमाज़ हैं तो जिसने नमाज़ को छोड़ दिया उसने कुफ्र किया।
{हवाला:सुन्ना इब्ने माज़ा शरीफ़ जिल्द:01 आहादीस:1079 सहीह सनद}
{हवाला:अल तहकीक ए ग़ज़ाली मुस्ताफाई}
6)- फुक़्हा ए अहले सुन्नत के नज़दीक नमाज़ में सुस्ती करने वाला शख़्स क़यामत के दिन खींजीर यानी सुअर की सूरत में उठेंगा।
{हवाला:क्या आप जानते हैं जिल्द:01 सफाह:439
{हवाला:अल तहकीक ए ग़ज़ाली मुस्ताफाई}
लैंखक व तालिबे दुआए शहादत:~फ़कीर मुआविया ज़फ़र ग़ज़ाली मुस्ताफाई रज़ा क़ादरी अमरोहीवी
7)हुज़ूर सरवर ए अंबिया ﷺ ईरशाद फरमाते है मुनाफिक या बदमज़हब को ऐ सरदार कह कर न पुकारों के अगर वो तुम्हारा सरदार हो तो बेशक तुमने अपने रब को नाराज़ किया|
{Rawah Abu Dawood Shareef}
8)हदीस शरीफ
_*🌹हदीस शरीफ🌹*_
_*हज़रत अब्दुल्लाह बिन उमर रदीअल्लाहु अन्हुमा रीवायत करते है के रसुलूल्लाह सल्लल्लाहु अलैही व सल्लम ने ईरशाद फरमाया *_
_*अपने मुर्दों कि (यानी जो मुसलमान विसाल कर गये इस दुनिया से) खुबिया बयान किया करो और उनकी बुराईयां ना बयान करो*_
*📚{Abu dawood, 4900}*
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*🌹हदीस शरीफ:🌹*
*जो_लोग_सुद_ब्याज़_खाते_है🔥🔥*
_फरमाने मुस्तफा ﷺ:_
_जिस रात मुझे मेराज कराई गई मैंने एक आदमी देखा वह एक नहर में तैर रहा था और उसके मुँह पर पत्थर फेंके जा रहे थे मैंने पूछा ये कौन है ? मुझे कहा गया कि ये सूद खोर है|_
*{मुसनद अहमद 5962 सहीह}*
_अल्लाहु अकबर! सुद खाने वालो अब भी वक्त है ऐसी कमाई को छोड दो,जो रब को बिलकुल पसंद नही| रब तआ़ला हम सब को हलाल कमाई खाने कि तौफिक अता फरमाये| आमिन!_
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*🌹Hadees Shareef🌹*
*मुहब्बत_ए_रसूलﷺ.*
_"हज़रते उमर رضي الله عنه ने दुआ फरमायी के या अल्लाह तआला तु मुझको अपनी राह मे शहीद होने का शरफ अता फरमा और मुझको अपने रसूल ﷺ के शहर में मौत अता फरमा."_
*[Bukhari Shareef, Jild 2, Safah 253]*
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*🌹Hadees Shareef🌹*
Huzoor Nabi e Kareem Rauf o Raheem ﷺ irshad farmate haiñ ek kooda barabar jannat ki jagah duniya aur uski saari cheezoñ se behtar hai.
_"हुजूर नबी ए करीम रहुफो रहीम ﷺ ईरशाद फरमाते है,एक कुडा बराबर जन्नत कि जगह दुनिया और उसकी सारी चिज़ों से बेहतर है|"_
*{Bukhari Shareef, Hadees No 3250.}*
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*🌹हदीस शरीफ🌹*
_हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैही व सल्लम ने ईरशाद फरमाया__
_*"एक जुमा दुसरे जुमा के दरमियान के सगिरा गुनाहो का कफ्फारा है"*_
*📚{सुनने ईब्ने माजा}*
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*🌹हदीस शरीफ🌹*
_हज़रत उमर बिन खत्ताब रदीअल्लाहु अन्हु से रिवायत है के हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैही व सल्लम ने फरमाया: "मिल कर खाया करो अलग-अलग न खाओ, क्यों कि बरकत मिल कर खाने से हसिल होती है|"_
*🌹Hadees Shareef🌹*
_Hazrat Umar Bin Khattab RadiyAllahu Ta’ala Anhu Se Riwayat Hai Ki Huzoor Nabi-E-Akram SallAllahu Ta’ala Alaihi Wa Aalehi Wa Sallam Ne Farmaya : Mil Kar Khaaya Karo Alag-Alag Na Khaao Kyoo’n Ki Barkat Mil Kar (Aur Ikatthey) Khaane Se Haasil Hoti Hai._
*📚{Ibn Majah As-Sunan, 02/1093, Raqam-3387}*
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*🌹हदीस शरीफ🌹*
_*हज़रत अनस बिन मलिक رضي الله عنه बयान करते है कि रसुलूल्लाह ﷺ ने फ़रमाया....*_
_*मेराज कि रात मै मुसा अलैहीस्सलाम के पास आया ,एक रिवायत मे है मेरा कसीब अहमर के पास से गुज़र हुआ दरान हलान कि "मुसा अलैहीस्सलाम अपनी कब़र मे खडे हुए नमाज़ पढ रहे थे"*_
_*इस्से यह पता चलता है कि अंबिया अपनी कबरो में जिंदा है और नमाज़ भी पढते है*_
*📚[Sahih Muslim, Kitabul Fazail, Hd.no: 5858, 5859.]*
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_*🌹फरमान ए मुस्तफाﷺ🌹*_
_*हज़रते बर्रा बिन अजि़ब رضي الله عنه से रीवायत है हूजु़र ﷺ इरशाद फरमाते है जब दो मुसलमान मिले और मुसाफाह करे (यानी हात मिलाना)तो उन दोनो के जुदा होने से पहले उनको बक्श दिया जाता है।*_
*📚{Tirmizi Shareef}*
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Rasoolullah صلى الله عليه وسلم Ne Farmaya,
"Jo Mujh Par Durood Bhejta Hai To Jab Tak Wo Mujh Par Durood Bhejta Rehta Hai Toh Farishte Bhi Uske Liye Duaye Rehmat Karte Hai Ab Bande Ki Marzi Hai Kam Padhe Ya Zyada".
{Sunan Ibn Majah,Vol:2,Page :71/72,Hadees:907}
*💫हदीस शरीफ*
रसुलूल्लाह صلى الله عليه وسلم ने फरमाया__
_"जो मुझपर दूरूद भेजता है तो जब तक वो मुझपर दूरूद भेजता रहता है तो फरिश्ते भी उसके लिए दूआये रहमत करते है अब बंदे कि मर्जी़ है कम पढे या ज्यादा"_
*📚{Sunan Ibn Majah,Vol:2,Page :71/72,Hadees:907}*
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_*🌹मफहुम ए हदीस🌹*_
_हुजू़र सल्लल्लाहू अलैही व सल्लम ने फरमाया_
_जुमा का दिन सब दिनो का सरदार है,अल्लाह पाक के नजदिक सब से बडा है और वो अल्लाह पाक के नजदिक ईद उल अझा और ईद उल फित्र से बडा है,अल्लाह ने इसमें हज़रते आदम को पैदा किया इसमे ज़मिन पर उन्हे उतारा और इस दिन दुबारा उन्ह अपने पास बुलाया।_
*📚[Sunan Ibne Majah, Jild 2, Page No. 8,Hadith No. 1084]*
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_*हदीस शरीफ*_
_🔥जहन्नम इतनी गहरी है कि अगर एक बड़ी चट्टान दोज़ख में फेंकी जाये तो उसे तह तक पहुंचने में 70 साल लग जायेंगे।_
*📚{तिर्मिज़ी,जिल्द 2,सफह 198}*
_*फुक़्हा* - अगर जहन्नम को सुई के नाके के बराबर खोल दिया जाये तो दुनिया वाले उसकी गर्मी से मर जायें और जहन्नम की कुछ वादियां ऐसी है कि खुद जहन्नम भी उनसे पनाह मांगा करता है।_
*📚{बहारे शरीअत,हिस्सा 1,सफह 49}*
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*🌹हदीस शरीफ:🌹*
_हजरत उरवाह रदीअल्लाहु तआ़ला अन्हु ने रिवायत किया है की जब वलिद बिन अब्द-इल-मलिक के ज़माने में (हुजरा ए मुबारक की) दीवार उन (लोगों) पर गिरी तो एक क़दम जाहिर हुआ, लोग डर गये और समझे की शायद येह हुजूर नबी ए अकरम सल्ललाहु तआ़ला अलैही व आलीही व सल्लम का क़दम मुबारक है,उन्हें पहचान ने वाला कोई न मिला, यहाँ तक की हजरत उरवाह रदीअल्लाहु तआ़ला अन्हु (पहचान लिया और) कहा :_
_"खुदा की कसम येह हुजूर नबी ए अकरम सल्ललाहु तआ़ला अलैही व आलीही व सल्लम का क़दम मुबारक नहीं बल्कि हजरत उमर रदीअल्लाहु तआ़ला अन्हु का कदम मुबारक है।"_
_(100 साल के बाद सही सलामत कदम मुबारक दिखना ये शान है नेक बन्दो की और ऐ लोगो बाज़ आओ गुस्ताकी करने से)_
*📚[Bukhari Fi As-Sahih, 01/468, Raqam-1326]*
https://chat.whatsapp.com/I8xkYGgLvWa8y6EygiBDIz
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*💫हदीस शरीफ*
रसुलूल्लाह صلى الله عليه وسلم ने फरमाया__
_"जो मुझपर दूरूद भेजता है तो जब तक वो मुझपर दूरूद भेजता रहता है तो फरिश्ते भी उसके लिए दूआये रहमत करते है अब बंदे कि मर्जी़ है कम पढे या ज्यादा"_
*📚{Sunan Ibn Majah,Vol:2,Page :71/72,Hadees:907}*
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_*🌹फरमान ए मुस्तफाﷺ🌹*_
_*हज़रते बर्रा बिन अजि़ब رضي الله عنه से रीवायत है हूजु़र ﷺ इरशाद फरमाते है जब दो मुसलमान मिले और मुसाफाह करे (यानी हात मिलाना)तो उन दोनो के जुदा होने से पहले उनको बक्श दिया जाता है।*_
*📚{Tirmizi Shareef}*
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*🌹हदीस शरीफ🌹*
_हूज़ुर सल्लल्लाहु अलैही व सल्लम ने फरमाया "जो शख्स ईस बात कि गवाही दे के अल्लाह तआ़ला के सिवा कोई माबूद नही और मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैही व सल्लम अल्लाह तआ़ला के रसूल हैं तो अल्लाह तआ़ला उस पर दोजख कि आग हराम फरमा देता है"_
*{Muslim Shareef,jild:1,Hadees:29}*
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_फरमाने मुस्तफा_
_हुजूर रहमते आलम ﷺ ईरशाद फरमाते है जो शख्स हमेशा अस्तगफार करता है अल्लाह तआ़ला हर किस्म कि तंगी परेशानी से निकलने कि राह उसपर खोल देगा।_
*📚{Abu Dawood Shareef}*
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_*🌹हदीस शरीफ🌹*_
_हज़रत अबु सईद खुदरी रदीअल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि नबी सल्लल्लाहु अलैही व सल्लम ने फरमाया तमाम लोगों में से सब से ज्यादा मुझ पर अबु बक़र रदीअल्लाहु अन्हु का इहसान है माल का भी और हम नशिनी का भी।_
*📚{Sahi Bukhari,kitabus salaat, 466}*
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*नबी ए करीम صلی اللہ تعالیٰ علیہ و سلم* ने फरमाया है के
"जो किसी मुसलमान से एक तकलीफ को दुनिया की तकलीफो मे से दूर कर दे
*अल्लाह तआला* उसकी कयामत के दिन की तकलीफो मे से एक तकलीफ को दूर फरमा देगा
और जो
किसी तंगदस्त पर दुनिया मे आसानी कर दे तो
*अल्लाह तआला* दुनिया व आखीरत मे उस पर आसानी फरमा देगा
और जो
किसी मुसलमान की दुनिया मे परदा पोशी करेगा तो
*अल्लाह तआला* उसकी दुनिया व आखीरत मे परदा पोशी फ़रमायेगा
और
*अल्लाह तआला बन्दे की मदद मे रहता है*
*जब तक के बन्दां अपने भाई की मदद मे रहता है* "
.
*🌹कनजुल आमाल जील्द 3🌹*
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_*🌹हदीस शरीफ🌹*_
_हूजूर नबी ए करीम ﷺ अपने सहाबा رضي الله عنهم से फरमाते है__ _क्या फाजीर(फाजीर यानी जो खुलेआम गुनाह करता हो) को बुरा कहने से परहेज़ करते हो? लोग इन्हे कब पहचानेंगे? फाजीर कि बुराईयां बयान करो ताकि लोग इस्से बचे।_
*#Kanzul Ummal, Safah 338.*
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*अवलाद को कम अक्ली से बचाने का नुस्खा*
रसुल अल्लाह सल्ललाहो अलैहे वसल्लम ने फरमाया *जो शख्स दस्तरखान से गीरे हूए टुकडो को उठाकर खाये वो फराखी की जीन्दगी गुजारता है और उसकी औलाद और औलाद की औलाद कम अक्ली से महफुज रहती है*
*🌹मुकाशीफतुल कुलुब पेज नम्बर 107🌹*
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*🌹Hadees Shareef🌹*
_Huzoor Rehmat Aalam ﷺ irshad farmate haiñ Allah جل جلاله se dua maangne se kabhi naa thako isliye ke dua maangne wala kabhi halaaq wa barbad na hoga._
*[An-Nisai Baab-us-Salaat Alan-Nabi jild 1, safah 190]*
*_🌹हदीस शरीफ🌹_*
_हूजू़र रहमते आलम ﷺ ईरशाद फरमाते हैं "अल्लाह جل جلاله से दुआ मांगने से कभी ना ठको इसलिए के दुआ मांगने वाला कभी हलाक़ व बरबाद न होगा।"_
*[An-Nisai Baab-us-Salaat Alan-Nabi jild 1, safah 190]*
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हज़रत अबु मुसा अल् अशारी रदीअल्लाहु तआ़ला अन्हु से रिवायत है कि रसुलूल्लाह सल्लल्लाहु अलैही व सल्लम ने फरमाया___
"भुके को खाना खिलाओ,बिमार कि अयादत करो,और कैदी को छुडावो|"
{Sahih Bukhari, Vol 6, 5373.}
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*_🌹हदीस शरीफ🌹_*
_हूज़ुर अलैहीस्सलाम ने ईरशाद फरमाया:हर बिमारी के लिए दवा है जब बिमारी को दवा पहुंच जायेगी तो अल्लाह के हुक्म से अच्छा हो जायेगा।_
*📚{Sahi Muslim Sharif}*
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*_🌹हदीस शरीफ🌹_*
_हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैही व सल्लम ने ईरशाद फरमाय:"बेशक अल्लाह पाक उस वक़्त तक बंदे कि तौबा क़ुबूल करता रहता है जब तब मौत कि कैफियत तारी ना हो।"_
*📚{Tirmizi Shareef}*
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_*🌹हदीस शरीफ🌹*_
_हूज़ुर सल्लल्लाहु अलैही व सल्लम ने फरमाया "जो शख्स ईस बात कि गवाही दे के अल्लाह तआ़ला के सिवा कोई माबूद नही और मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैही व सल्लम अल्लाह तआ़ला के रसूल हैं तो अल्लाह तआ़ला उस पर दोजख कि आग हराम फरमा देता है"_
*{Muslim Shareef,jild:1,Hadees:29}*
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*_🌹हदीस शरीफ🌹_*
_नबी ए करीम ﷺ इरशाद फरमाते हैं कि जो दिन को रोज़ा रखे और रात भर नमाज़ पढ़े मगर उसकी *ज़बान👅* से लोग परेशान होते हों तो उसमें कोई भलाई नहीं बल्कि ये उसे जहन्नम में ले जायेगी।_
*📚{अलमुस्तदरक हाकिम,जिल्द 4,सफह 166}*
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*_🌹हदीस शरीफ🌹_*
_रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया जब कीसी कौम मे *बेहयाई* के काम ऐलानीया होने लगे तो उनमे *ताऊन* और वो *बीमारीया* आम हो जाती है जो पहले कभी जाहीर नही हुई थी।_
.
*🌹इब्ने ए माजा 4019🌹*
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*_🌹हदीस शरीफ🌹_*
_हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैही व सल्लम ने ईरशाद फरमाय:"बेशक अल्लाह पाक उस वक़्त तक बंदे कि तौबा क़ुबूल करता रहता है जब तब मौत कि कैफियत तारी ना हो।"_
*📚{Tirmizi Shareef}*
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_*🌹हदीस शरीफ🌹*_
_हज़रत जाबीर बिन समुराह रदीअल्लाहु अन्हु से रीवायत है के हूजुर सल्लल्लाहु अलैही व सल्लम ईरशाद फरमाते है बेशक मै मक्का मुअज़्जमा में उस पत्थर को पहचानता हुं जो ऐलाने नबुव्वत से कब्ल यानी पहले मुझको सलाम करता था।_
*📚{Muslim Shareef, Jild 2, Safah 245}*
*🌹Hadees Shareef🌹*
_Hazrate Jaabir Bin Samurah رضي الله عنه se riwayat hai Huzoor e Akram ﷺ irshad farmate haiñ beshak maiñ Makkah Muazzama mein uss patthar ko khoob pehchanta hu jo ailane Nubuwwat se qabl Mujhko salaam karta tha._
*📚{Muslim Shareef, Jild 2, Safah 245}*
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हजरत मुआज़ बिन जबल कहेते हैं
*अल्लाह तआला के ज़िक़्र से बढ़ कर अल्लाह के अज़ाब से बचाने*
*वाली ओर कोई चीज़ नहीं*
.
*🌹जामे तिर्मिज़ी3377🌹*
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*🌹जिस घर में मुसलसल तीन रात सूरह बक़रा की आख़री दो आयात पढ़ी जाए, शयातीन उस घर के क़रीब भी नही भटक सकते।🌹*
📝नबी ए करीम صلى اللّٰه تعالىٰ عليه وسلم ने फ़रमाया: "अल्लाह عزوجل ने ज़मीन व आसमान पैदा करने से दो हज़ार साल पहले एक किताब लिखी, उस किताब की दो आयतें नाज़िल कीं और उन्हीं दोनों आयतों पर *सुरह बक़रा* को ख़त्म किया, जिस घर में ये दोनों आयतें (मुसलसल) तीन रातें पढ़ी जाएंगी मुमकिन नहीं है कि शैतान उस घर के क़रीब आ सके!!
📔(जामे तिर्मिज़ी हदीस नम्बर 2882,
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*🌹हदीस शरीफ🌹*
_हजरत इब्राहिम इब्ने मैसराह रज़ियल्लाहु तआला अन्हु से रिवायत है कि हुजूर ने फ़रमाया जिसने बद मजहब की इज़्ज़त की उसने इस्लाम को ढहाने में मदद की !_
*📚( हवाला : मिश्कात शरीफ )*
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*🌹हदीस शरीफ🌹*
_नबी-ऐ-करीम सल्ललाहो अलैहे वसल्लम ने ईरशाद फरमाया जीसने तंगदस्त को मुहलत दी या उसका कर्ज माफ कर दीया अल्लाह तआला कयामत के दीन उसे अर्श के साये मे रखेगा जब के ईस के सीवा कोई साया ना होंगा।_
*🌹तीरमीजी शरीफ🌹*
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*_🌹हदीस शरीफ🌹_*
_हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैही व सल्लम फरमाते है के जो बंदा नमाज़ में है अल्लाह तआ़ला कि रहमत ए खस्सा उसकी तरफ मुतवज्जा रहती है जब तक इधर उधर न देखे जब उसने मुह फेरा उसकी रहमत भी फिर जाती है।_
(यानी नमाज़ में इधर उधर नही देखना चाहीए)
📚 _*[Mustadrakul Hakim Jild 1 Safah 504 Hadees 896.]*_
_*🌹Hadees Shareef🌹*_
Huzoor Nabi E Kareem sallALLAHu alaihi wasallam farmate hai ke-
⏩"Jo banda namaz me hai ALLAH ta'aala ki rahmat e khassa uski taraf mutawajjo rehti hai jab tak idhar udhar na dekhe jab usne apna muh fera uski rahmat bhi fir jati hai."⏪
Yani:- Namaz me idhar udhar nahi dekhna chahiye.
📚 _*[Mustadrakul Hakim Jild 1 Safah 504 Hadees 896.]*_
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*_🌹हदीस शरीफ🌹_*
_हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैही व सल्लम फरमाते है के जो बंदा नमाज़ में है अल्लाह तआ़ला कि रहमत ए खस्सा उसकी तरफ मुतवज्जा रहती है जब तक इधर उधर न देखे जब उसने मुह फेरा उसकी रहमत भी फिर जाती है।_
(यानी नमाज़ में इधर उधर नही देखना चाहीए)
📚 _*[Mustadrakul Hakim Jild 1 Safah 504 Hadees 896.]*_
_*🌹Hadees Shareef🌹*_
Huzoor Nabi E Kareem sallALLAHu alaihi wasallam farmate hai ke-
⏩"Jo banda namaz me hai ALLAH ta'aala ki rahmat e khassa uski taraf mutawajjo rehti hai jab tak idhar udhar na dekhe jab usne apna muh fera uski rahmat bhi fir jati hai."⏪
Yani:- Namaz me idhar udhar nahi dekhna chahiye.
📚 _*[Mustadrakul Hakim Jild 1 Safah 504 Hadees 896.]*_
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_*🌹हदीस शरीफ🌹*_
_रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया जो शख्स किन्ही दो लोगों में झगडे करवाए या उनके रिश्ते ख़राब करे अल्लाह उसपे गज़बनाक होगा और दुनिया और आखिरत में लानत करेगा।_
*🌹महफुम-ए-हादीस🌹*
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_*🌹हदीस शरीफ🌹*_
_हुजूर रहमते आलम ﷺ ईरशाद फरमाते है जो शख्स हमेशा अस्तगफार करता है अल्लाह तआ़ला हर किस्म कि तंगी परेशानी से निकलने कि राह उसपर खोल देगा।_
*🌹अबु दाऊद शरीफ🌹*
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*_🌹हदीस शरीफ🌹_*
_नबी अलैहीस्सलाम ने ईरशाद फरमाया: मै तुम पर गवाह हुं और कसम खुदा कि मै इस वक़्त भी यहां ये अपना हौजे कौसर देख रहा हुं अल्लाह तआ़ला ने जमिन के सारे खज़ाने कि कुंजियां मुझे अता कर दिए या ये फरमाया के मुझे खज़ाने दे दिए ज़मिन के और अल्लाह कि कसम मुझे इस बात का खौफ नही के तुम मेरे बाद शिर्क करोगो,मुझे सिर्फ इस बात का डर है के तुम आपस में बुग्ज़ रखोगे दुनिया के लिए (यानी दुनिया में दौलत और शोहरत हासिल करने के लिए)।_
*📚{Bukhari Shareef,1344}*
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*_🌹हदीस शरीफ🌹_*
_*हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैही व सल्लम ने ईरशाद फरमाया "जिसने कुरआ़न पढ़ा और जो कुछ उस में है उस पर अमल किया उस के वालिदैन को कयामत के दिन ताज़ पहनाया जायेगा,जिसकी रौशनी सुरज से अच्छी है।"*_
*📚{Abu Dawood Shareef}*
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*🔥बुराई पर खामोश रहने वाले गौर से पढ़े.*
*अल्लाह عزوجل ने हज़रत युशे बिन नून السلام علیکم पर वही फ़रमाई:-*
*मैं तुम्हारी क़ौम में "40,000" नेक लोगों और "60,000" बुरे लोगों को हलाक करने वाला हु.*
*युशे बिन नून السلام علیکم ने अर्ज़ किया अये अल्लाह! बुरे लोगों को हलाक करना तो ठिक है लेकिन उन नेक लोगों का क्या कसूर है?*
*अल्लाह عزوجل ने फरमाया उनको उनपर गुस्सा नहीं आया और वो उनके साथ खाते पीते है.*
📚अल उकुबात ली इब्ने अबी दुनिया हदीस न,13
📚तंबीहूल ग़ाफ़िलीन जिल्द 1,सफ़हा 96
📚इहया उल उलूम जिल्द 2 सफ़हा 450
*📝 आज हम सभी लोग अपना जायज़ा ले क्या हम बुराई को देखकर ख़ामोश रेहने वालों में और उनके साथ ही दोस्ती रखने वालों में नही है?*
*कभी रिश्तेदारी के नाम पे कभी दोस्ती के नाम पे, हम आज बुरों को बुरा कहना ही नही चाहते. ना उनसे दूर होना चाहते है.*
📑स्कैन👇🏻
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हमारे आक़ा हूजुर अलैहिस्सलाम ने फरमाया__
जो अपनी किसी वक्त की नमाज़ को भूल जाये उसके वक़्त में सोता रह जाये और याद आने पर पढ़ ले तो यही उसका कफ़्फारा (बदला) है।
👉 यानी कोई नमाज़ के वक्त सोता रहा और नमाज़ कज़ा हो गई तो उसको चाहिए जल्द नमाज अदा करे।
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हज़रत जाबिर रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है:
📚{Muslim Sharif: 82}
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_*हमारे आक़ा रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया:*_
*_जो शख़्स किसी मोमिन की दुनिया की परेशानियों में से कोई परेशानी दूर करेगा,अल्लाह तआला क़ियामत के दिन उसकी परेशानियों में से कोई परेशानी दूर करेगा। और जो किसी तंगहाल पर आसानी करेगा,अल्लाह तआला दुनिया और आख़िरत में उसके लिए आसानी फ़रमाएगा।_*
*📚{ सहीह मुस्लिम : 2699}*
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*हदीस शरीफ*
हज़रत अब्दुल्लाह बिन अम्र रज़िअल्लाहु अन्हु से रिवायत है
रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया:
*_✍🏻जो आदमी नमाज़ की हिफ़ाज़त नहीं करता,क़यामत के दिन वह क़ारून, फ़िरऔन, हामान और उबै बिन ख़लफ़ के साथ होगा।_*
*📚{Musnad Ahmad: 6576}*
⚠️यानी उसका ठीकाना जहन्नुम है।
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*हमारे नबी अलैहिस्सलाम जिंदा है कब्र में*
रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया:
“तुम मुझ पर दरूद पढ़ा करो, तुम्हारा दरूद मुझ तक पहुँचा दिया जाता है।”
सहाबा ने पूछा: या रसूलल्लाह! आपकी वफ़ात के बाद कैसे?
आप ﷺ ने फ़रमाया:
“अल्लाह ने ज़मीन पर हराम कर दिया है कि वह अंबिया के जिस्मों को खाए।”
{अबू दाऊद: 1047 – सहीह}
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*❖ मफ़हूमे फरमाने मुस्तफा ﷺ ❖*
*हुज़ुर सैयदे आलम, नुरे मुजस्सम ﷺ ने इर्शाद फरमाया*
❝ *तुम्हारी औलाद जब सात बरस की हो जाऐ तो नमाज़ की ताकीद करो और जब वोह दस बरस के हो तो नमाज़ छोड़ने पर उन को मारो* ❞
▓ *अबु दाउद शरीफ, हदीष शरीफ#494*
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*❤हदीस शरीफ ❤*
*रसूल अल्लाह ﷺ ने फ़रमाया*
_✍🏻अपने आप को,अपनी औलाद को, अपने खादिमों को, और अपने माल को बद्दुआ ना दो ऐसा ना हो कि वह घड़ी दुआ की काबिलियत की हो, और तुम्हारी दुआ कबूल हो जाए।_
*📗सुन्न अबू दाऊद 1532)*
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*❤मस्जिद तक क़दम रखने का सवाब❤*
हज़रत अबू हुरैरा रदीअल्लाहु अन्हु से रिवायत है
✍🏻हमारे आक़ा नबी ﷺ ने फ़रमाया__
_जो शख़्स अपने घर में वुज़ू करे, फिर अल्लाह के घरों में से किसी घर (मस्जिद) की तरफ़ जाए,तो हर क़दम पर एक नेकी लिखी जाती है, एक गुनाह मिटाया जाता है और एक दर्जा बुलंद किया जाता है_
*📚{सहीह मुस्लिम: 666}*
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*हमारे आक़ा नबी अलैहिस्सलाम ने फरमाया__*
_*मेरी शफ़ाअत मेरी उम्मत के बड़े-बड़े गुनाहगारों के लिए है।*_
{Sunan Ibn Majah, 4310}
⚠️लोग कहते है नबी अलैहिस्सलाम अपनी बेटी को भी नही बक्शवायेंगे माज़अल्लाह,उन लोगो ने सिर्फ अपने मतलब कि हदीसे पढी है। यहां तो हुजूर फरमा रहे है मै बडे बडे गुनहगारों कि शफाअत करुंगा।
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*लोगो में इंसाफ करो*
*हदीश शरीफ:*
हज़रत अबू हुरैरा रदीअल्लाहु अन्हु से रिवायत है:
_क़यामत के दिन अल्लाह के नज़दीक सबसे प्यारे और सबसे क़रीब वे लोग होंगे, जो इंसाफ करने वाले हैं।जो अपने फ़ैसलों में, अपने घर वालों के बारे में और जिनके हक़ में उन्हें हुक्म दिया गया हो,सब में इंसाफ करते हैं।_
*{Muslim Sharif}*
*हदीश शरीफ:*
_इंसाफ करने वाला आदमी, क़ियामत के दिन नूर के मिम्बरों पर होगा।_
*{Sunan Nasai}*
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`हर शख्स मौत के बाद अफसोस करेगा।`
_*✍🏻रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमायाः हर शख्स मौत के बाद अफसोस करेगा, सहाबा ने अर्ज कियाः या रसूल अल्लाह ﷺ किस बात का अफसोस करेगा? आप ﷺ ने फ़रमाया अगर नेक है, तो ज़्यादा नेकी न करने का अफसोस करेगा और अगर गुनाहगार है तो गुनाह से न रूकने पर अफसोस करेगा*_
*📚 {सुनन तिरमिज़ी हदीस- 2403}*
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*ग़ीबत, चुगली और पेशाब से न बचने पर अज़ाब*
हदीस शरीफ:
हमारे आक़ा नबी ﷺ ने दो क़ब्रों के पास से गुज़रते हुए फ़रमाया:
इन दोनों को अज़ाब दिया जा रहा है और किसी बड़ी चीज़ की वजह से नहीं।
एक पेशाब से साफ़ नहीं रहता था,
और दूसरा चुगली फैलाता था।
*{बुख़ारी शरीफ}*
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*❤हदीस शरीफ❤*
✍🏻हमारे हूजुर ﷺ ने फ़रमाया:
_अल्लाह के नज़दीक सबसे नापसंद लोग वे हैं जो बहुत झगड़ालू होते हैं_
*{सहीह बुखारी}*
✍🏻हमारे हुजूर ﷺ ने फ़रमाया:
_लोगों में फूट डालने वाला सबसे बदतर इंसान है।_
*Bukhari Sharif*
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झूठ बोलना:
*ह़ज़रते आ़यशा रज़ियल्लाहु अ़न्हा फ़रमाती हैं नबी-ए-करीम ﷺ के नज़दीक झूठ से बढ़कर कोई और आ़दत नफ़रत के क़ाबिल ना-पसंदीदा नहीं थी।*
📚 `तिर्मिज़ी शरीफ़ 1973`
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*तौहीद (एक अल्लाह को मानना☝)*
रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया:
_जो शख़्स दिल से यह गवाही दे कि अल्लाह के सिवा कोई सच्चा माबूद नहीं और मुहम्मद ﷺ अल्लाह के रसूल हैं तो वह जहन्नम से बच जाएगा।_
*{Bukhari shareef,Hadis No-128}*
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*जुव्वा हराम है*
हमारे आका हुजूर ﷺ ने फ़रमाया:
_जिसने जुआ खेला, वह नाजायज़ माल खाता है।_
*{मुसनद अहमद}*
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*ग़ीबत क्या है?*
रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया:
_क्या तुम जानते हो ग़ीबत क्या है? सहाबा ने عرض किया: अल्लाह और उसका रसूल बेहतर जानते हैं।_
नबी ﷺ ने फ़रमाया:
_अपने भाई की वह बात करना जो उसे नापसंद हो।_
सहाबा ने पूछा:
_अगर वह बात उसमें है तो?_
नबी ﷺ ने फ़रमाया:
_अगर वह बात उसमें है तो वही ग़ीबत है, और अगर वह बात उसमें नहीं है तो यह तोहमत (बदनामी) है।_
*{Muslim Shareef: 2589}*
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हमारे आका ﷺ ने फ़रमाया:
_जो रिश्तेदारी को तोड़े, वह जन्नत में दाख़िल नहीं होगा।_
*{सहीह बुख़ारी,5984}*
⚠️ बात-बात पर रिश्तेदार से झगडा यह रब तआला को पसंद नही,और ये जहन्नुम मे जाने का काम है। रिश्तेदार कितने भी गलत हो हम उसने अच्छे से पेश आये। यही हमारे नबी अलैहिस्सलाम कि तालिमात है।
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*जहन्नम का सबसे हल्का अज़ाब 🔥*
हुज़ूर ﷺ ने फ़रमाया:
_जहन्नम में सबसे हल्का अज़ाब पाने वाला वह होगा जिसके पैरों के नीचे दो अंगारे रखे जाएंगे, जिससे उसका दिमाग उबलने लगेगा, जैसे हांडी उबलती है।_
*📚 {सहीह बुखारी: 6562}*
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तखलीफ पर सब्र करना
रसूल अल्लाह ﷺ ने फ़रमाया मफहूम:-
मुस्लमान को जो थकावट, बिमारी, दुख या तकलीफ पहुंचती है यहां तक की कांटा जो उसे चुभता है अल्लाह तआला उसके बदले उसके गुनाह माफ़ कर देता है।
📗(सहीह बुखारी 5641)
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*हदीस शरीफ*
हज़रत अब्दुल्लाह इब्न उमर रज़िअल्लाहु अन्हु ने रिवायत किया__
_"जो किसी क़ौम की मुशाबहत (नकल / Copy) करता है, वह उन्हीं में से है।"_
*{अबू दाऊद , हदीस नं:4031}*
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पैग़म्बर मुहम्मद ﷺ ने फ़रमाया मफहूम:-
जो शख़्स किसी तंग-दस्त को मोहलत दे या उसे क़र्ज़ माफ़ कर दे, तो अल्लाह उसे अपने (अर्श के) साये में साया अता फ़रमाएगा।
(मिशकात शरीफ:2904)
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*क़यामत के दिन शफाअत*
रसूलुल्लाह ﷺ ने फरमाया:
_“हर नबी की एक खास दुआ होती है जो क़बूल होती है,और हर नबी ने अपनी दुआ दुनिया में कर ली,_
_मगर मैंने अपनी दुआ क़यामत के दिन अपनी उम्मत की शफाअत के लिए बचा रखी है।”_
*{सहीह मुस्लिम,हदीस 193}*
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पैग़म्बर मुहम्मद ﷺ ने फ़रमाया मफहूम:-
खाओ, पियो, सदका करो और कपड़े पहनो, मगर फ़िजूलखर्ची और घमंड मत करो।
(सुन्नन अन्नसाई:2559)
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दाऊद इब्न सालेह ने फ़रमाया:
"मारवान इब्न अल-हकम ने एक दिन एक आदमी को हुज़ूर ﷺ की क़ब्र ए अनवर के ऊपर अपना चेहरा रखते हुए देखा।
उन्होंने कहा: "क्या आप जानते हैं कि आप क्या कर रहे हैं?"
जब वह उनके पास आये तो उन्हें एहसास हुआ कि यह अबू अय्यूब अल अंसारी رضي الله عنه थे, उन्होंने कहा: "हां; मैं पैगंबर ए इस्लाम मुहम्मद ﷺ के पास आया हूं, किसी बुत के पास नहीं।"
{मुसनद अहमद 5:422, अल-मुअज़म अल-कबीर 4:189, मजमा अल-ज़वायद 5:245}
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माँ-बाप को दुख देने वाला जहन्नम का हकदार है
रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया:
“अल्लाह की रज़ा माँ-बाप की रज़ा में है, और अल्लाह का ग़ज़ब माँ-बाप के ग़ज़ब में।”
(तिर्मिज़ी: 1899)
📖 मतलब अगर माँ-बाप नाराज़ हैं तो अल्लाह भी नाराज़ है।
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रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया मफहूम:-
जिसने लोगों पर हुकूमत की और उनके साथ नर्मी और रहम का बर्ताव किया, तो अल्लाह क़ियामत के दिन उस पर रहम करेगा।
(सहीह मुस्लिम:2592)
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_हज़रत मु'आविया बिन जाहिमा रज़ि. से रिवायत है कि उन्होंने कहा: मैं नबी (ﷺ) के पास आया और कहा, “ऐ अल्लाह के रसूल! मैं जिहाद करना चाहता हूँ और आपके मशवरे के लिए आया हूँ।” तो आपने फ़रमाया: “क्या तेरी माँ ज़िंदा है?” मैंने कहा: “हाँ।” तो आपने फ़रमाया: “उसी के पास रहो, क्योंकि जन्नत उसकी क़दमों के नीचे है।”_
📚 (नासाई: 3104, सही)
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*तकलीफ़ से गुनाह माफ़ होते हैं:*
🔹 हदीस:
_"जो भी तकलीफ़, बीमारी, दुख, ग़म या कांटे जैसी छोटी चोट भी किसी मुसलमान को लगती है — अल्लाह तआला उस तकलीफ़ के ज़रिए उसके गुनाह माफ़ कर देता है।"_
*(बुख़ारी और मुस्लिम)*
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रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया:
_"इस्लाम पाँच चीज़ों पर क़ायम है: कलिमा (ला इलाहा इल्लल्लाह मुहम्मदुर्रसूलुल्लाह) की गवाही, नमाज़ क़ायम करना, ज़कात अदा करना, रमज़ान के रोज़े रखना और हज करना।"_
(सहीह बुख़ारी: 8, सहीह मुस्लिम: 16)
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हुज़ूर ﷺ ने फ़रमाया__
_"अल्लाह जब किसी का सदक़ा (दान) क़ुबूल करता है, तो वह सिर्फ़ हलाल कमाई से करता है। हराम माल से किया गया सदक़ा, नमाज़ और हज क़ुबूल नहीं होता।"_
*{सहीह मुस्लिम, हदीस 1015}*
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