Tuesday, 10 December 2024
Friday, 30 August 2024
मिलादुन्नबी दलिल हिंदी |Eid e Milaad Dalil Hindi
पोस्ट-1
#मिलाद_और_अबू_लहब_के_आज़ाब_में_कमी.
हदीस शरीफ:
हज़रत ईब्ने अब्बास रदीअल्लाहु तअ़ाला अन्हु का बयान है कि__
जब अबू लहब मर गया तो एक साल के बाद मैने ख्वाब में अबू लहब को बुरे हाल मे देखा उसने कहा कि मैने तुम्हारे बाद कोई राहत नही पाया, सिवाये इसके के पीर के दिन मुझपर अज़ाब हलका कर दिया जाता है, यह इसलिए के पीर के दिन नबी ﷺ पैदा हुए और सोबीया ने आपको विलादत कि खबर दी तो इसपर सोबीया को आज़ाद कर दिया।
📚{Bukhari Shareef}
⚠️नोट: एक काफिर ने नबी अलैहीस्सलाम कि पैदाईश की खबर सुनकर लौंडी को आज़ाद किया इसपर रब तआ़ला ने उसका आज़ाब मे कमी कि..
सोचो ऐ मुसलमानो हम मुसलमान होकर खर्च क्यों न करे खुशी क्यो न मनाये..
#यह_करे
👉शरीयत के दायरे मे रहकर मिलाद मनाये,अल्लाह पाक और उसके रसुल का ज़िक्र करे, गरीबो को खिलाये फातेहा ख्वानी करे,और हराम कामो से बचे और लोगो को भी बचाये, डिजे म्युज़िक हराम है। नाच कर सुन्नीयों का नाम खराब न करे।
#SunniTiger ✒
Saturday, 17 August 2024
अबरहा बादशाह जब हाथी वालो का लश्कर काबा शरीफ ढाने आया
हुज़ूरﷺ की पैदाइश से सिर्फ पचपन (55) दिन पहले यमन का बादशाह *अबरहा* हाथियों की फ़ौज ले कर *का'बा* शरीफ ढाने के लिए मक्का पर हमला आवर हुवा था। इस का सबब (वजह) यह थी की *अबरहा* ने यमन के दारूस्सल्तनत सन्आ में एक बहुत ही शानदार और आलीशान *"गिरजा घर"*(चर्च) बनाया और यह कोशिश करने लगा की अरब के लोग काबा शरीफ़ के बजाए यमन आ कर इस गिरजा घर का हज़ किया करें। जब मक्का वालों को यह मालूम हुआ तो कबीलए *किनाना* का एक शख्स गेज़ो गज़ब में जल भुन कर यमन गया और वहां के गिरजा घर में पाखाना करके उसको नजासत (गंदगी) से लत- पत कर दिया। जब *अबरहा* ने यह वाकिआ सुना तो तेश (गुस्से) में आकर आपे से बाहर हों गया। और काबा शरीफ़ को ढाने के लिए हाथियों की फ़ौज लेकर मक्का शरीफ़ पर हमला कर दिया। और उसकी फ़ौज के अगले दस्ते ने मक्का वालों के तमाम ऊंटो और दूसरे मवेशी जानवरों को छीन लिया उसमें दो सौ या चार सौ (200-400) ऊंट *हुज़ूरﷺ* के दादा हज़रत अब्दुल मुत्तलिब रदी अल्लाहो अन्हूं के भी थे।
हजरत अब्दुल मुत्तलीब को इस वाकिए से बड़ा रंज (दुःख) पहुंचा। चुनांचे आप इस मु- आमले में गुफ्तगू करने के लिए उस के लश्कर में तशरीफ़ ले गए। जब *अबरहा* को मालूम हुवा कि कुरैश का सरदार मुझ से मुलाकात करने के लिए आए है। तो उस ने आप को अपने खैमे में बुला लिया और जब अब्दुल मुत्तलीब को देखा की एक बुलंद कामत रोबदर और निहायत हसीनो जमील आदमी है जिनकी पेशानी पर नूरे *नब्बूवत* का जाहो जलाल चमक रहा है तो सूरत देखते ही अबरहा मरऊब *(Attrect)* हो गया। और ताज़िम के लिए अपने तख्त ए शाही से खड़ा हो गया और अपने बराबर बिठा कर दरयाफ्त किया की कहिए: सरदार ए कुरैश! यहां आपकी तशरीफ़ आवरी का क्या मकसद है? अब्दुल मुत्तलिब ने जवाब दिया की हमारे ऊंट और बकरियां वगैरह जो आपके सिपाही हांक (छीन) लाए है। आप इन सब मवेशियों को हमारे सुपुर्द कर दीजिए।
यह सुनकर *अबरहा* ने कहा कि : ए सरदारे कुरैश मैं तो यह समझता था की आप बहुत ही हौसलामंद और शानदार आदमी है। मगर आपने मुझसे अपने ऊंटो का सवाल करके मेरी नज़रों में अपना वकार (इज़्जत) कम कर दी है। ऊंट और बकरी की हकीकत ही क्या है? मैं तो आपके *काबा शरीफ़* को तोड़-फोड़ कर बर्बाद करने के लिये आया हुं।
आपने उसके बारे में कोई गुफ्तगू नहीं की। अब्दुल मुत्तलिब ने कहां मुझे तो अपने ऊंटो से मतलब है काबा शरीफ़ मेरा घर नहीं है बल्कि वोह अल्लाह करीम का घर है। वोह खुद अपने घर को बचा लेगा। मुझे काबे की ज़रा भी फिक्र नहीं है। यह सुन कर *अबरहा* अपने फिराऔनी लहज़े में कहने लगा की ए सरदार ए मक्का! सुन लीजिए में काबे को ढा (तोड़) कर उसकी ईट से ईट बजा दूंगा और रूए जमीन से इसका नामों निशान मिटा दूंगा। क्युकी मक्का वालों ने मेरे गिरजा घर की बड़ी बे-हुर्मति (बेइज्जती) की है। इसलिए में इसका इम्तिकाम (बदला) लेने के लिए काबे को मिस्मार (तोड़) कर देना जरूरी समझता हुं। अब्दुल मुत्तलिब ने फरमाया फिर आप जाने और खुदा जाने में आपसे सिफ़ारिश करने वाला कौन? इस गुफ्तगू के बाद *अबरहा* ने तमाम मवेशी जानवरों को वापस कर देने का हुक्म दे दिया। और अब्दुल मुत्तलिब अपने तमाम ऊंटों और बकरियों को वापस लेकर घर चले आए और लोगों से कहा तुम लोग अपने-अपने माल और मवेशियों को लेकर *मक्का शरीफ* से बाहर निकल जाओ और पहाड़ों की चोटियों पे चढ़ कर और दरो में छुप कर पनाह लो।
मक्का वालों से यह कहकर फिर खुद आप खानदान वालों के चंद आदमियों को साथ लेकर खाना ए काबा में गए और दरवाजे का हल्का पकड़ कर इंतहाई और गिरया व ज़ारी के साथ (रो- रो) कर अल्लाह करीम से इस तरह दुआ मांगने लगे की ए अल्लाह! बेशक हर शख्स अपने-अपने घर की हिफाज़त करता है। तू भी अपने घर की हिफाज़त फरमा। सलीब वालों और सलीब के पुजारियों (ईसाईयों) के मुकाबले अपने इताअत गुज़ारो की मदद फरमा। अब्दुल मुत्तलिब ने यह दुआ मांगी और अपने खानदान वालों को साथ लेकर पहाड़ की चोटी पर चड़ गए। और खुदा ए तआला की कुदरत का जल्वा देखने लगे। *अबरहा* जब सुबह के काबा शरीफ ढाने के लिए अपने लश्करे जर्रार और हाथियों की कितार के साथ आगे बढ़ा और मकामे *मगसम* में पहुंचा तो खुद उसका *हाथी* जिसका नाम "महमूद" था एक दम बैठ गया। उसे काफी मारा और उठाने की कोशिश की गईं लेकिन हाथी नहीं उठा। इसी हाल में कहरे इलाही (खुदा का अज़ाब) अबाबिलो (एक किस्म का पक्षी) की शक्ल में नमूदार (जाहिर) हुआ। और नन्हें-नन्हें परिंदे झुंड के झुंड जिनकी चोंच और पंजों में तीन-तीन कंकरिया (पत्थर के छोटे-छोटे टुकड़े) थे। समुंदर की जानिब से काबा शरीफ की तरफ आने लगे। अबाबिलो के इन दलबादल लश्करों ने *अबरहा* के लश्करों पर इस जोर-शोर से संगबारी शुरू कर दी की कुछ ही पल में *अबरहा* के लश्कर और उसके हाथियों के परखच्चे उड़ गए। अबाबीलो की संगबारी खुदा वंदे कह्हार व जब्बार के कहरो गज़ब की ऐसी मार थी की जब कोई कंकरी किसी फिल सुवार के सिर पर पड़ती थी तो वोह उस आदमी के बदन को छेदती हुईं हाथी के बदन से पार हो जाती थी। *अबरहा* की फ़ौज का एक आदमी भी जिंदा नहीं बचा सब के सब *अबरहा* और उसके साथियों समेत ऐसे हलाक और बर्बाद हो गए की उनके जिस्मों की बोटियां (गोश्त के) टुकड़े-टुकड़े होकर जमीन पर बिखर गईं। चुनांचे खुदा ए पाक ने इस वाकिए का जिक्र करते हुए इरशाद फरमाया:
[ ए महबूब क्या आपने न देखा की आपके रब ने उन हाथी वालों का क्या हाल कर डाला क्या उनके दाऊं को तबाही में न डाला और उन पर परिंदो की टुकड़ियां भेजी ताकि उन्हें कंकरो के पत्थर से मारे तो उन्हें चबाएं हूए भुस जैसा बना डाला।"]
जब *अबरहा* और उसके लश्करो का यह अंजाम हुवा तो अब्दुल मुत्तलिब पहाड़ से नीचे उतरे और खुदा का शुक्र अदा किया उनकी इस करामत का दूर दूर तक चर्चा हो गया। और तमाम अहले अरब इनको एक खुदा रसीदा बुजुर्ग की हैसियत से काबिले एहतराम (इज़्जत वाला) समझने लगें!
*[📗हवाला:- सिरते मुस्तफाﷺ पेज 54,55,56,57]*
📜जारी रहेगा....
________________________________
*पेशकर्दा:- ✍🏻अख़्तर नक्शबंदी मुज्जदिदी*
Friday, 26 July 2024
Shia ke kufriya aqeede #raddeshiat #raddeshiyat
SHIA V/S QURAN
IMAAM MEHDI JAB AAYENGE TOH ASAL QURAN LE AAYENGE
( MAAZ ALLAH )
📚( AHSAN-UL-MUQABIL , JILD : 2 , PAGE : 336 )
SHIA KI AMBIYA KI SHAN MEIN BAKKI GAYI KUFRIYAT
TAMAAM PEGAMBER ZINDA HO KAR HAZRAT ALI K MA'TEHAT HO KAR JEHAD KAREGE.
( MAAZ ALLAH )
📚( TAFSEER-E-AYYASHI , JILD : 1 , PAGE : 181 )
SHIA KI AMBIYA KI SHAN MEIN BAKKI GAYI KUFRIYAT
HAZRAT YOUNUS ALEHI SALAM NE WILAYAT-E-ALI KO QABOOL NA KIYA, JISS KI WAJEB SE ALLAH ﷻ NE UNHE MACHLI K PAIT MEIN DAAL DIYA.
( MAAZ ALLAH )
📚( HAYAT-UL-QULOOB , JILD : 1 , PAGE : 459 )
SHIA KI AMBIYA KI SHAN MEIN BAKKI GAYI KUFRIYAT
MARTABA-E-IMAMAT , MARTABA-E-PEGAMBARI SE BAALA'TAR HAI.
( MAAZ ALLAH )
📚( HAYAT-UL-QULOOB , JILD : 3 , PAGE : 2 )
KYA AB BHI KOI IN KHATMALO KO MUSALMAN SAMJHEGA ? ? ? ?
SHIA KI SAHABA E KIRAM KI SHAN MEIN BAKKI GAYI KUFRIYAT
HAZRAT ABU BAKR-O-UMAR-O-USMAN , HAZRAT ALI KI IMAMAT TARK KAR DENE KI WAJEH SE MURTAD ( KAFIR ) HO GAYE.
( MAAZ ALLAH )
📚( USOOL-E-KAFI , JILD : 1 , PAGE : 420 )
SHIA KI SAHABA E KIRAM KI SHAN MEIN BAKKI GAYI KUFRIYAT
HAZRAT UMAR BADE BE-HAYA OR BE-GERAT THE.
( MAAZ ALLAH )
📚 ( NOOR-UL-EMAN , PAGE : 75 )
SHIA KI SAHABA E KIRAM KI SHAN MEIN BAKKI GAYI KUFRIYAT
۞ HAZRAT ABBAS OR HAZRAT AQEEL , ZALEEL UNNAFS AUR KAMZOOR EMAAN WALE THE.
( MAAZ ALLAH )
📚( HAYAT-UL-QULOOB , JILD : 2 , PAGE : 618 )
SHIA KI SAHABA E KIRAM KI SHAN MEIN BAKKI GAYI KUFRIYAT
۞ "HAZRAT AISHA , HAZRAT ZUBAIR AUR HAZRAT TALHA WAJIB UL QATAL THE"
( MAAZ ALLAH )
📚( BAGAWB-BANU-UMAYYA-O-MUAVIA , PAGE : 474 )
SHIA KI SAHABA E KIRAM KI SHAN MEIN BAKKI GAYI KUFRIYAT
۞ "HAZRAT AISHA KA SHARI'AT SE KOI TALUQ NAHI"
( MAAZ ALLAH )
📚( SHARI'AT-O-SHIA'IAT , PAGE : 45 )
SHIA KI SAHABA E KIRAM KI SHAN MEIN BAKKI GAYI KUFRIYAT
۞ "SHIA KA KHUMENI LIKHTA HAI HAZRAT UMAR KAFIR O ZANDEEQ THA"
۞ "MAZEED LIKHTA HAI HAZRAT USMAN GAARAT GAR THA"
۞ "UNKI KHILAFAT MEIN FAHASHI KA SILSILA SHURU HUWA"
( MAAZ ALLAH )
#shia #shiakafir #hazratali #sufisme #sufi #sufipoetry #pakistan #india #islam #i̇slam #deen #quran #shariat #AalaHazrat #muftieazam #tajushshariah #taajushshariahalaihirrahmah #naqvi #madihanaqvi #mohsinnaqvi #wahabi #deobandi #ahlesunnah #ahlebait #hazrataliquotes
Friday, 21 June 2024
Sir sayyad Ahmad Khan | सर सय्यद अहमद खान
#नेचरी_किसे_कहते_हैं_नेचरी_फिरके_का_बानी_कौन
आज कल कुछ हमारे ही सुन्नी भाई जो अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में तालीम याफ्ता हैं वो एक मलऊन मरदूद सर सय्यद अहमद खान को जाने क्या क्या मानते हैं उसकी सालगिरह मनाते हैं सोशल मीडिया पर उसकी तस्वीर के साथ खिराज़ ए अकीदत पेश करते हैं आइए सर सय्यद अहमद खान नेचरी फिरके के कुछ अक़ाइद ओ नज़रियात देखिए
"नेचरी वो फ़िरक़ा है जिस का अक़ीदा ये है कि जैसे आदमी का नेचर हो वैसा दीन होना चाहिए मतलब ये कि अल्लाह व रसूल के अहकामात व क़वानीन का नाम दीन नही है बल्कि जो आदमी का नेचर हो वैसा दीन होना चाहिए इस फिरके नेचरी कहते हैं इस फिरके का बानी सर सय्यद अहमद खान था सर सय्यद के इस्लाम के खिलाफ कुफ़्रिया अक़ीदे सर सय्यद के खास और चहीते शागिर्द और पैरोकार खालिद नेचरी के खास पसंदीदा शख्स जियाउद्दीन नेचरी की किताब "खुद नविश्त अफ़कार ए सर सय्यद की चंद इबारतें आपके सामने पेश हैं "
#अक़ीदा:-खुदा ना हिन्दू है ना आरज़ी मुसलमान ना मुकल्लीद है ना ला मज़हब ना यहूदी है ना ईसाई बल्कि वो तो पक्का छटा हुआ नेचरी है (किताब खुद नविश्त सफा 63)
#अक़ीदा:- खुदा ने उन अनपढ़ बद्दुओं के लिए उन ही की जुबान में कुरान उतारा यानी सर सय्यद के ख्याल में कुरान अंग्रेजी जो उसके नज़दीक बेहतर व आला जुबान है उस मे नाज़िल होना चाहिए लेकिन खुदा ने अनपढ़ बद्दुओं की जुबान अरबी में कुरान नाज़िल किया (मआज़ अल्लाह) (किताब खुद नविश्त)
#अक़ीदा:-शैतान के मुताल्लिक सर सय्यद का अक़ीदा ये था कि वो खुद इंसान में एक कुव्वत है जो इंसान को सीधे रास्ते पर से फेरती है शैतान के वुजूद को इंसान के अंदर मानता है इंसान से अलग नही मानता (किताब खुद नविश्त सफा 75)
#अक़ीदा :-हज़रत आदम अलैहिस्सलाम का जन्नत में रहना फरिश्तों का सज्दा करना हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम और इमाम मेहदी रदिअल्लाहु तआला अन्हु का ज़हूर दज़्ज़ाल की आमद फरिश्ते का सूर फूंकना रोज़ ज़ज़ा व सजा मैदान ए महशर पुल सिरात हुज़ूर अलैहिस्सलाम की शफ़ाअत अल्लाह पाक का दीदार इन सब अक़ाइद का इनकार किया जो कि कुरान व हदीस से साबित है (खुद नविश्त सफा 24 से 132 तक)
#अक़ीदा:- खुल्फ़ा ए राशिदीन के बारे में ये कहता है कि खिलाफत हर किसी को अख्तियार था जिसकी चल गयी वो खलीफा हो गया मतलब इज़मा ए उम्मत का इनकार (सफा 233)
#अक़ीदा:-हज में कुर्बानी की कोई मज़हबी असल कुरान से नही पाई जाती आगे लिखता है कि इसका कुछ भी निशान मज़हब ए इस्लाम मे नही हज की कुर्बानी दर हकीकत मज़हबी कुर्बानियां नही हैं (मआज़ अल्लाह (सफा 139)
#अक़ीदा :- जब एक जामा मस्जिद के लिए इन से चंदा तलब किया गया तो सर सय्यद ने चंदा देने से इनकार कर दिया और लिख भेजा मैं खुदा के जिंदा घरों (कॉलेज) की तामीर की फिक्र में हूँ और आप लोगो को ईंट मिट्टी की तामीर का ख्याल है (सफा 101)
सर सय्यद अहमद फ़िरक़ा ए वहाबियत से ताअल्लुक़ रखता था बाद में इसने नेचरी फिरके की बुनियाद रखी अंग्रेजो का एजेंट नाम निहाद लंबी दाढ़ी वाला गुमराह शख्स था इसको इस्लामी खैर ख़्वाह कहने वाले इसके बातिल अक़ीदे पढ़ के होश के नाखून लें इसको अच्छा आदमी कह कर या लिख कर अपने ईमान के दुश्मन ना बने
All scan👇🏻
Ishraq ki namaaz | इशराक की नमाज़
इशराक की नमाज़ यह भी सुन्नत है। फज्र पढ़कर दुरूद शरीफ वगैरह पढ़ता रहे। जब सूरज ज़रा ऊंचा हो जाये यानी कम से कम निकलने के बाद बीस मिनट गुज़र...
-
*हिन्दी/hinglish* *गुस्ताख़े रसूल का अंजाम* *===============================* *ⓩ काफ़िर वलीद बिन मुग़ीरा ने एक मर्तबा हुज़ूर सल्लल्ला...
-
POST:1 Hazrat Ameer Muaviya Hazrat ibne Abbas ki Nazar mein Hazrat Ibne Abbas say Pocha Gaya Kay Aap Hazrat Ameer ul Mominin Ameer Muaviya...
-
1)- सैय्यदउल मुरसलीन कासिम ए रिज्कअल्लाह आकाओं मौला हुज़ूर रसूलअल्लाह सल्लल्लाहो ताआला अलैहि वसल्लमﷺ ईरशाद ए हक्कों नूर फरमाते हैं बंदे के...





































































