इशराक की नमाज़
यह भी सुन्नत है। फज्र पढ़कर दुरूद शरीफ वगैरह पढ़ता रहे। जब सूरज ज़रा ऊंचा हो जाये यानी कम से कम निकलने के बाद बीस मिनट गुज़र जाये तो दो रकअत पढ़े।
चाश्त की नमाज़
यह भी सुन्नत है। कम से कम दो रकअत और ज़्यादा से ज़्यादा बारह रकअतें हैं और बारह ही अफज़ल हैं। इसका वक़्त, सूरज के अच्छी तरह ऊंचे होने के बाद से ज़हवए कुबरा के शुरू होने तक है लेकिन बेहतर वक़्त चौथाई दिन चढ़े है।
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