Wednesday, 29 May 2019

Zakaat/jakaat/zaqaat/ ka bayaan/ ज़कात का बयान /जकात कितने माल पर निकाले? | jakat

ज़कात का बयान




रब का फरमान:

तर्जमा कन्ज़ुल ईमान: तुमसे पूछते हैं क्या ख़र्च करें तुम फ़रमाओ जो कुछ माल नेकी में ख़र्च करो तो वह माँ बाप और यतीमों और मोहताज़ों (दरिद्रों) और राहगीर के लिये है और जो भलाई करो बेशक अल्लाह उसे जानता है।

📖सूरह बकराह' आयत-215)




POST:1

नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैही व सल्लम फरमाते है, दोज़ख में सब से पहले 3 शख्स जायेंगे, उनमे का एक वो मालदार होगा जिसने अपने माल में से अल्लाह तआ़ला का हक़ (यानी ज़कात और सदक़ा) अदा नही किया।

{Sahi Ibn Khuzaimah, Hadees No:2249}


POST:2

Nabi E Kareem صلی الله عليه وسلم Ka Farman Hai, SADQAH De Kar Apne Aur ALLAH Ke Beech Rabtah (Contact) Mazboot Karo, Tumahri Madad Bhi Ki Jayegi Aur Tumhare Nuqsaan Ki Bharpaai Bhi Ki Jayegi.


नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैही व सल्लम का फरमान है, सदक़ा देकर अपने और अल्लाह के बीच राब्ता (कॉन्ट्रैक्ट) मज़बूत करो, तुम्हारी मदद भी कि जायेगी और तुम्हारे नुकसान कि भरपाई भी कि जायेगी।

{Ibn E Majah #1081}



*जकात कितने माल पर वाजिब होती है❓*

*👉🏻52.5 तोला चांदी या 7.5 तोला सोना या इतने पैसे जितने मे 52.5 तोला चांदी खरीदी जा सकती हो और वह पैसे को जमा रखे हुए एक साल गुजरा हो तो जकात वाजिब हो गई|*

*जकात कितनी देना वाजिब है❓*

*👉🏻माल का 40 वा हिस्सा यानी 100 रुपये कि 2.50 रुपये जकात है*

*मिसाल के तौर पर चांदी का रेट 700 रु तोला है तो 52.5 चांदी कि रक्कम 37 हज़ार रुपये हो गई  उसकि ज़कात 925 रुपये होगी|*

*📚{बहारे शरीअ़त}*





Zakat Sahi Sahi Tareeqe se Nikale or Haqdaar tak Pahunchaye.

Defination of #Zakat:

#Allah Tala Ne Maldar Musalmano Ke Maal Me Se Eik bohat  chotha sa Hissa (2.5%) Allah Ki Raah me Ghareeboun k liye Muqarrar Farmaya ! Us Hisse Ka Musalman Faqeer(Ghareeb) Ko Malik(owner) Banana Zakat Kehlata Hai, Magar Wo FAQEER  Hashmi (Sayyid/Syed) Na Ho.

Zakat Farz Hone ki Kuch Conditions:

1. Musalman Hona.
2. AAQIL (AQL WALA) HONA.
3. BAALIGH  HONA.
4. AZAD HONA.
5. MAAL KA NISAB(Malik e Nisab Hona) KO PAHOCHNA AUR WO USKE MILQ (QABZE) ME HONA.
6. MALIKE NISAB (Qarz) Se farigh Hona.
7. Nisab Ka Hajate Asliya(Daily Use karne Wali Chizau se Extra) Se Farig Hona.
8. Maal Pe Eik Saal Guzarna.

5th point in detail Yaani Maalik e Nisab kise kahte hai , Zakat Kitne Amount rahne par farz hoti hai:

52.5 Tola Chani (Silver) Uske paas Maujood ho Ya phir 7.5 Tola Sona (Gold) uske paas ho ya phir Itna Cash Jisme 52.5 Tola Chandi Ka Amount banjata ho ! Ya phir todha Sona , todha Chandi , todha cash ho or sabka Total agar Karenge toh 52.5 Tola Chandi Ka Amount banjayega toh us par Zakat Farz hai yaani Wo Maalik e Nisab hai.

Note: 1 Tola = 10 Grams.

Business Ka Maal , Ya phir Apne Own Ghar (House) ke Ilawa Dusra Extra Ghar ho, ya Own vehicle ke  Ilawa koi Extra Vehicle ho toh wo sab Zakat ke Amount me Add hogi , In -Short Jo hum Daily Use karte hai Wo Zakat  me Add Nahi hai Jo extra hai Wo zakat me add hogi.

Zakat Total kitni banegi:
Dekhiye Jab Aap #Malik_e_Nisab (Uper details me bataya gaya hai ) honge tab Apko Apne Sare property  Ka Total karna hai ! Sona , Chandi , Cash , Business Ka Maal , Jo Koi extra Chize hai sabka Total price Aaj ke Current Rate se kare yaani Jis Din zakat nikal rahe ho us din ka Sona, Chandi , property  ka Market Value lekar Total kare.

Zakat ka total kaise kare:

Over-All Total jo hua hai Sab ka ! Ye sirf Example hai : Over-All total 2 lakhs hua hai toh Isko 2 lakhs ko 2.5 se multiply kare or Jo Result aayega usko 100 se divide kare jis tarah uper Photo me bataya gaya ! 2 lakhs ki 2.5% zakat hogi = 5000 5 hazar.

Ye sirf Example tha Jitna Total amount hoga uski 2.5% Nikale.





*#गुजारीश-*

प्यारे ईस्लामी भाईयो जिसपर ज़कात वाजिब है वह ज़कात जरुर दे

और सही जगह पर आपकी ज़कात जा रही है या नही यह देखकर तहकिक कर के दे

हर बार यह देखने को मिलता है कि लोग अपनी ज़कात मदरसो को या तंज़ीम को देते है याद रहे ज़कात पर हक़ गरीबो का है।किसी को भी देकर अपनी ज़कात बरबाद न करे। और कुछ लोग आमिर होते है वह लोग किसी एक आदमी को बुलाकर उसके हाथ मे जकात का पैसा दे देते है और वह आदमी कुछ रुपया बांट देता है बाकि की अपने पास रख लेता हैl

इस वजह से जकात जिसको मिलना चाहीए उसको नही मिल पातीl

होश मे आओ ऐ मुसलमानों , बहोत सारे हमारे ईस्लामी भाई ऐसे है जो मुह खोलकर नही मांगते जिनके पास ईद पर मिठा खाना तक नही बनता न ही उनके पास ईद के दिन नये कपडे होते है😭

👉🏻आप कि जकात पर सब से पहला हक़ आप के करीबी रिश्तेदारों का है
फिर पड़ोसी और मोहल्ले वालों का
उस के बाद आप के शहर के यतिमखाने, और मदरसो का है.


जकात कितने माल पर वाजिब होती है❓

👉🏻52.5 तोला चांदी या 7.5 तोला सोना या इतने पैसे जितने मे 52.5 तोला चांदी खरीदी जा सकती हो और वो पैसे 1 साल से सेविंग है तो जकात वाजिब हो गई|


जकात कितनी देना वाजिब है❓

👉🏻माल का 40 वा हिस्सा यानी 100 रुपये कि 2.50 रुपये जकात हैl

मिसाल के तौर पर 25 हज़ार कि ज़कात 625 रुपये होगी|

*⚠️नोट:आज के दौर के हिसाब से सोने चांदी कि किमत पर जका़त निकाले।*

*📚{बहारे शरीअ़त}*


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सवाल :

जो पैसा बैंक में जमा है क्या उसकि भी ज़कात देनी होगी?

जवाब

जो पैसा बैंक में जमा है उस पर भी ज़कात वाजिब है। (यानी ज़कात देनी होगी)

-मुफ्ती ईमरानुल कादरी साहब,  STM,मुंबई



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💰ज़कात का बयान' क़ुरआन की रौशनी में)


🕋अल्लाह तआला फ़रमाता है:

तर्जमा कन्ज़ुल ईमान: तुमसे पूछते हैं क्या ख़र्च करें तुम फ़रमाओ जो कुछ माल नेकी में ख़र्च करो तो वह माँ बाप और यतीमों और मोहताज़ों (दरिद्रों) और राहगीर के लिये है और जो भलाई करो बेशक अल्लाह उसे जानता है।

📖सूरह बकराह' आयत-215)


🕋तर्जमा कन्ज़ुल ईमान: और तुमसे पूछते हैं क्या ख़र्च करें तुम फ़रमाओ जो फ़ाज़िल (अतिरक्त) बचे इसी तरह अल्लाह तुमसे आयतें बयान फ़रमाता है कि कहीं सोचकर करो तुम दुनिया और आख़िरत के काम।

📖सूरह बकराह' आयत-219)


🕋तर्जमा कन्ज़ुल ईमान: और मुत्तक़ी वह है कि हमने जो उन्हें दिया है उसमें से हमारी राह में ख़र्च करते है।

📖सूरह बकराह' आयत-3)


🕋तर्जमा कन्ज़ुल ईमान: उनके मालों में से सदका लो उसकी वजह से उन्हें पाक और सुथरा बना दो।

📖सूरह अत तौबा' आयत-103)


🕋और अल्लाह तआला फ़रमाता है:

तर्जमा कन्ज़ुल ईमान: फ़लाह पाते वह है जो जकात अदा करते हैं।

📖सूरह अल मोमिनून' आयत-4)


🕋और फ़रमाता है:

तर्जमा कन्ज़ुल ईमान: और जो कुछ तुम ख़र्च करोगे अल्लाह उसकी जगह और देगा वह बेहतर रोज़ी देने वाला है।

📖सूरह सबा' आयत-39)


🕋और फ़रमाता है:

तर्जमा कन्ज़ुल ईमान: जो लोग अल्लाह की राह में ख़र्च करते हैं उनकी कहावत उस दाने की है जिस से सात बालें निकलीं, हर बाल में सौ दाने और अल्लाह जिसे चाहता है ज़्यादा देता है और अल्लाह वुसअ़त वाला और बड़ा इ़ल्म वाला है।

जो लोग अल्लाह की राह में अपने माल को ख़र्च करते हैं फिर ख़र्च करने के बाद न एहसान जताते न अज़ियत देते हैं उनके लिए उनका सवाब उनके रब के हुज़ूर है और उन पर कुछ ख़ौफ़  है और न वह ग़मगीन होंगे अच्छी बात और मग़फिरत उस सदके से बेहतर है जिस के बअ़्द अज़ियत देना हो और अल्लाह बेपरवाह ह़िल्म (सहिष्णुता) वाला है।

📖सूरह बकराह' आयत-261 ता 263)


🕋और फ़रमाता है:

तर्जमा कन्ज़ुल ईमान: हरगिज़ नेकी हासिल न करोगे जब-तक उस में से न ख़र्च करो जिसे मह़बूब रखते हो और जो कुछ ख़र्च करोगे अल्लाह उसे जानता है।

📖सूरह आले इमरान' आयत-92 ता 93)


🕋और फ़रमाता है:

तर्जमा कन्ज़ुल ईमान: नेकी इसका नाम नहीं कि मशारिक़ व मग़ारिब की तरफ़ मुँह कर दो नेकी तो उसकी है जो अल्लाह और पिछले दिन और मलाइका व किताब व अम्बिया पर ईमान लाया और माल को उसकी मह़ब्बत पर रिश्तेदारों और यतीमों और मिस्कीनों और मुसाफ़िर और साइलीन (मांगने वाले) को और गर्दन छुटाने में दिया और नमाज़ क़ाइम  की और जकात दी और नेक वह लोग हैं कि जब कोई मुआ़हदा करें तो अपने  अ़हद को पूरा करें और तकलीफ़ व मुसीबत और लड़ाई के वक़्त स़ब्र करने वाले वह लोग सच्चे हैं और वही लोग मुत्तक़ी (परहेज़गार) हैं।

📖सूरह बकराह' आयत-177)


🕋और फ़रमाता है:

तर्जमा कन्ज़ुल ईमान: जो लोग बुख़्ल (कंजूसी) करते हैं उसके साथ जो अल्लाह ने अपने फ़ज़्ल से उन्हें दिया वह यह गुमान न करें कि यह उनके लिए बेहतर है बल्कि यह उनके लिये बुरा है उस चीज़ का क़ियामत के दिन उनके गले में त़ौक़ डाला जायेगा जिसके साथ बुख़्ल किया।

📖सूरह आले इमरान' आयत-180)


🕋और फ़रमाता है:

तर्जमा कन्ज़ुल ईमान: जो लोग सोना और चाँदी जमा करते और उसे अल्लाह की राह में ख़र्च नहीं करते हैं उन्हें दर्दनाक अ़ज़ाब की खुशख़बरी सुना दो जिस दिन आतिशे जहन्नुम में वह तपाये जायेंगे और उनसे उन की परेशानियां और करवटें और पीठें दागी जायेंगी (और उन से कहा जायेगा) यह वही है जो तुमने अपने नफ़्स के लिए जमा किया था तो अब चख़ो जो जमा करते थे।

📖सूरह अत तौबा' आयत-34 ता 35)

📗हिन्दी बहारे शरीअत' Vol-1, पाँचवां हिस्सा, पेज़ नं 5 ता 6)


✍️हज़रत अब्दुल्लाह इब्ने मसऊ़द रज़ियल्लाहो तआला अन्हु' ने फ़रमाया: कोई रुपया दूसरे रुपये पर न रखा जायेगा न कोई अशर्फ़ी दूसरी अ़शर्फ़ी पर बल्कि ज़कात न देने वाले का जिस्म इतना बड़ा कर दिया जायेगा कि लाखों करोड़ों जमा किये हों तो हर रुपया जुदा दाग देगा।

📗हिन्दी बहारे शरीअत' Vol-1, पाँचवां हिस्सा, पेज़ नं 6)


✍️नीज़ ज़कात के बयान में ब-कसरत आयात वारिद हुई जिनसे उसका मोहतम बिश्शान होना ज़ाहिर है यानी जिससे ज़कात की शान की अज़मत ज़ाहिर होती है।

📗हिन्दी बहारे शरीअत' Vol-1, पाँचवां हिस्सा, पेज़ नं 6)

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4 comments:

  1. JazakALLAHU khair bhai... InshaALLAH jaroor

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  2. Great Article, Thanks For Sharing this usefull Aticle Sir.

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  3. Shukriya Hazrat Aapne Bahut achi islamic information diya ham bhi Zoseme par aisa hi islamic information dete hain

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